भजन संहिता 32:2
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क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
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Treasury of Scripture Knowledge references in IRV.
क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
¶ यीशु ने उससे कहा, ‹“जा, अपने पति को यहाँ बुला ला।”›
¶ उन्होंने उसको उत्तर दिया, “हमारा पिता तो अब्राहम है।” यीशु ने उनसे कहा, ‹“यदि तुम अब्राहम के सन्तान होते, तो अब्राहम के समान काम करते।›
वे इस्राएली हैं, लेपालकपन का हक़, महिमा, वाचाएँ, व्यवस्था का उपहार, परमेश्वर की उपासना, और प्रतिज्ञाएँ उन्हीं की हैं।
क्योंकि यथार्थ खतनावाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुआई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते।
न तो उसने पाप किया, और न उसके मुँह से छल की कोई बात निकली।