All books in IRV

नीतिवचन 26

IRV · verse 2

31 chapters

IRV / नीतिवचन / Chapter 26

IRV · verse 2

जैसे गौरैया घूमते-घूमते और शूपाबेनी उड़ते-उड़ते नहीं बैठती, वैसे ही व्यर्थ श्राप नहीं पड़ता।