भजन संहिता 58:4
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उनमें सर्प का सा विष है; वे उस नाग के समान है, जो सुनना नहीं चाहता;
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مراجع Treasury of Scripture Knowledge في IRV.
उनमें सर्प का सा विष है; वे उस नाग के समान है, जो सुनना नहीं चाहता;
¶ जब उसने बहुत से फरीसियों और सदूकियों को बपतिस्मा के लिये अपने पास आते देखा, तो उनसे कहा, “हे साँप के बच्चों, तुम्हें किसने चेतावनी दी कि आनेवाले क्रोध से भागो?
‹हे साँपों, हे करैतों के बच्चों, तुम नरक के दण्ड से कैसे बचोगे?›
“हे सारे कपट और सब चतुराई से भरे हुए शैतान की सन्तान, सकल धार्मिकता के बैरी, क्या तू प्रभु के सीधे मार्गों को टेढ़ा करना न छोड़ेगा?
ताकि दो बे-बदल बातों के द्वारा जिनके विषय में परमेश्वर का झूठा ठहरना अनहोना है, हमारा दृढ़ता से ढाढ़स बन्ध जाए, जो शरण लेने को इसलिए दौड़े हैं, कि उस आशा को जो सामने रखी हुई है प्राप्त करें।