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TSK · नीतिवचन 12:27

مراجع Treasury of Scripture Knowledge في IRV.

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धर्मी का थोड़ा सा धन दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है।

आलसी का प्राण लालसा तो करता है, परन्तु उसको कुछ नहीं मिलता, परन्तु कामकाजी हष्ट-पुष्ट हो जाते हैं।

अन्याय के बड़े लाभ से, न्याय से थोड़ा ही प्राप्त करना उत्तम है।

जैसे किवाड़ अपनी चूल पर घूमता है, वैसे ही आलसी अपनी खाट पर करवटें लेता है।