मत्ती 11:6
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‹और धन्य है वह, जो मेरे कारण ठोकर न खाए।”›
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Treasury of Scripture Knowledge references in IRV.
‹और धन्य है वह, जो मेरे कारण ठोकर न खाए।”›
¶ इस प्रकार उन्होंने उसके कारण ठोकर खाई, पर यीशु ने उनसे कहा, ‹“भविष्यद्वक्ता का अपने नगर और अपने घर को छोड़ और कहीं निरादर नहीं होता।”›
¶ तब यीशु ने उनसे कहा, ‹“तुम सब आज ही रात को मेरे विषय में ठोकर खाओगे; क्योंकि लिखा है,› ‹‘मैं चरवाहे को मारूँगा; › ‹और झुण्ड की भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी।’›
¶ ‹“› ‹यदि संसार तुम से बैर रखता है›‹, तो तुम जानते हो, कि उसने तुम से पहले मुझसे भी बैर रखा।›
भला तो यह है, कि तू न माँस खाए, और न दाखरस पीए, न और कुछ ऐसा करे, जिससे तेरा भाई ठोकर खाए।
और, “ ठेस लगने का पत्थर और ठोकर खाने की चट्टान हो गया है,” क्योंकि वे तो वचन को न मानकर ठोकर खाते हैं और इसी के लिये वे ठहराए भी गए थे।